आप लोग ही करे फैसला - क्या छोड़ दे ब्लोगिंग ?

10:21 am गजेन्द्र सिंह 58 Comments

नमस्कार,

सभी पाठको से विनम्र निवेदन है की इस ब्लॉग पर कल १४-०९-२०१० की पोस्ट को लेकर हुए विवाद के चलते इस ब्लॉग पर एक विजेट पोल लगाया गया है, अतः आप इस पर अपनी राय प्रकट करे, इस पोस्ट के ब्लॉग पर रहने या न रहने का फैसला अब आप लोगो की राय पर निर्भर है।

पाठको
से निवेदन है अपना सहयोग बनाये रखे और इस विवाद को हल करने में मेरी मदद करे।
ब्लॉग पर कुछ सभ्य लोगो द्वारा एवं एक बेनामी शख्स के द्वारा की गई असभ्य टिप्पणियों से मन आहत हो गया है, क्या ब्लोगिंग छोड़ दी जाये ?

हमारे देश में अपनी बात कहने का अधिकार सभी लोगो को है किन्तु किसी और पर किसी भी प्रकार की टिपण्णी करने के लिए सभ्य भाषा का इस्तेमाल तो किया ही जा सकता है,

हम सभी ब्लॉगर इन्टरनेट पर हिंदी के प्रचार प्रसार में सहयोग कर रहे है, हिंदी दिवस पर ही असभ्य शब्दों का प्रयोग करके हम कौन सी हिंदी का प्रचार कर रहे है ।



नोट :- जब तक इस विवाद का अंत नहीं हो जाता तब तक इस ब्लॉग पर कोई नई पोस्ट का प्रकाशन नहीं होगा ।


विवादित पोस्ट - प्यारी सीता, में यहाँ खुश हूँ, आशा है तू भी ठीक होगी ......

58 टिप्‍पणियां:

  1. सलीम खान जी,
    धन्यवाद आपके सहयोग का,

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  2. इतनी प्यारी पोस्ट...

    चार लोगों ने भला बुरा कहा... आपने वोट लगा दिया... हम वोट से एक ठो अच्छा एम् एल ऐ नहीं चुन सकते आप पोस्ट पर क्या फैसला देंगे..


    कब तक लोगों की परवाह कर लिखते मिटाते रहेगें.. जय हो..

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  3. ये देखे यू ट्यूब पर पुरी रामायण लगी है..

    http://www.youtube.com/results?search_query=haryanvi%20ramayan&search=Search&sa=X&oi=spell&resnum=0&spell=1

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  4. कुछ तो लोग कहेंगे लोगो का काम है कहना !

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  5. आपकी पोस्ट मुझे अच्छी ठीक लगी थी -हिन्दू देवी देवताओं को लेकर स्वस्थ व्यंग की परम्परा पुरानी है ! केवल इत्ती सी बात को लेकर ब्लागगिंग छोड़ देने की बात अल्बत्ता जरूर बुरी लग रही है !

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  6. गजेन्द्र जी, नमस्कार
    आपका ब्लॉग बहुत अच्छा है, में इसका नियमित पाठक हूँ , किसी की कही २ - ४ बातों से आप इस ब्लॉग तो बंद तो नहीं कर सकते

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  7. और फिर रंजन जी ने आपको एक लिंक पोस्ट किया है, आप इस पर ही देख लीजिये की क्या यहाँ रामायण का उपहास नहीं हो रहा है .....

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  8. ब्लोगिंग की दुनिया में ये नयी बात नहीं , यहाँ पर ऐसे भी लोग है जो दुसरो को ऊपर जाता नहीं देख सकते

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  9. आपके लेखन का स्तर और इस ब्लॉग की पाठक संख्या दिन प्रति दिन बढती जा रही है ......

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  10. आजकल टी वी पर बहुत सारे प्रोग्राम आते है हास्य पर - इनमे न जाने किन किन महान लोगो पर व्यंग किये जाते है

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  11. ब्लोगिंग की दुनिया में कुछ अश्लील ब्लॉग भी मौजूद है क्या तब इन पढने वालो का सिर शर्म से नहीं झुकता ....

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  12. और दीपक जी और अमित शर्मा जी को अगर इस पोस्ट को पढ़कर कोई ठेस पहुची है तो उन्हें रंजन जी के द्वारा दिया गया लिंक देखना चाहिए

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  13. इस पोस्ट पर मिली टिप्पणिया ही दर्शाती की आपकी ये ब्लॉग और ये पोस्ट लोगो को कितना पसंद है ...

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  14. आपकी वह पोस्ट जिस पर विवाद है वाकई बहुत अच्छी है, आपको किसी के कहने पर ब्लॉग बंद करने की आवश्यकता है

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  15. स्वयं शिवम् मिश्र जी ने आपकी पोस्ट को अपनी ब्लॉग चर्चा में शामिल किया है,

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  16. और फिर रंजन जी ने ही कहा है कि हम वोट से एक ठो अच्छा एम् एल ऐ नहीं चुन सकते आप पोस्ट पर क्या फैसला देंगे..

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  17. सभी बातो का सार यह है कि आप जो लिख रहे है वो अपनी जगह बिलकुल सही है ....हास्य को केवल हास्य के तरीके से ही पढ़ा जाना चाहिए

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  18. जैस आप लिखना चाहते है आप लिख सकते, कृपया इस ब्लॉग को बंद न करे

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  19. और बाकि आपको पोल के नतीजो से पता चल जायेगा कि कितने लोग आपके लेखन को और इस ब्लॉग को पसंद करते है

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  20. ब्लाग क्यों छोडे भला? आप अपना काम कीजिए। जिन्हें पसंद नहीं, वे इस ब्लाग पर नहीं आएंगे... और क्या :)

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  21. "ब्लाग क्यों छोडे भला? आप अपना काम कीजिए। जिन्हें पसंद नहीं, वे इस ब्लाग पर नहीं आएंगे... और क्या :)"
    भैये, तुम भी तो यही करके आये हो हमारे ब्लॉग पर, हम भी यही करेंगे, लेकिन ज्यादा ही करेंगे।

    @ संभवत: लास्ट पोस्ट:
    ----------------
    ये अबकी बार मार के देख, अबकी बार मार के देख वाला फ़ार्मूला 44 है। कोई लास्ट वास्ट पोस्ट नहीं है और न ही होनी चाहिये। ऊपर वाला कमेंट बिल्कुल सही है, ब्लॉग किसी एक की या एक विचारधारा की जागीर नहीं है। अपनी आत्मा की आवाज सुनिये, मानिये। गाना है न - प्यार चाहिये या पैसा चाहिये.....।
    हमारे मतलब का लगेगा तो आगे से आयेंगे नहीं तो एक दो के जाने से आपको कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा, और बहुत से हैं आने वाले, चढ़ाने वाले।
    शुभकामनायें, दिल से।

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  22. अभी पडी वो पोस्ट ,मुझे तो इसमें कुछ आपत्तिजनक नहीं लगा ,सदियों से होता आ रहाहै ये स्वर्ग और देवी - देवता पर खूब लिख बोल कर प्रोग्राम बनाये जाते हैं.

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  23. blog band karne se kya hoga... ham sabhi vakif hai ki kis tarah devi devtaon par fikre kaste log nazar aate hai.... es vishya par maine bhi ek lekh likha hai.. kabhi blog par jarur post karungi.. kyonki mujhe bhi yah sab achha nahi lagta...
    ...

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  24. आपकी पीड़ा मैं समझ सकता हूँ क्योंकि मैं भी कुछ इसी प्रकार की स्तिथि से गुजर रहा हूँ और इस कदम पर भी विचार कर रहा हूँ ,सचमुच ये चीज़ें हमें बहुत आहत करती हैं लेकिन फिर भी मेरा आपसे तो यही कहना है की आपको ब्लॉग्गिंग नहीं छोड़नी चाहिए ,आपके ब्लॉग की हर पोस्ट बेहद मज़ेदार और शानदार होती है ,जो लोग आपत्ति कर रहें हैं उन्हें ये बात समझनी चाहिए की हास्य और व्यंग्य को उसी के नज़रिए से देखा जाना चाहिए ना की personal होके

    महक

    महक

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  25. गजेन्‍द्र जी मैंने अपने ब्‍लाग पर अपनी टिप्‍पणी देखी और उसके नीचे आपकी टीप कि क्‍या ब्‍लागिंग छोड़ दें। अब इस बहस में पढ़ने का मेरा कोई मन नहीं था। फिर देखा कि आपने यह पोल आयोजन और संभवत: यह सवाल भी मेरी आज की टिप्‍पणी से ही सामने रखा है तो लगा कि नहीं बहस में पड़ना ही होगा।
    पहली बात तो यह कि मैंने हटाने केवल एक सुझाव दिया था। इसलिए नहीं कि उससे कोई समस्‍या हो रही है। इसलिए कि मेरे मत में वह आपके ब्‍लाग के स्‍तर की नहीं है। और उसके रहने से बाद में आपके ब्‍लाग पर आने वालों में कईयों के लिए एक क्षोभ का कारण बनेगी।

    दूसरी बात हिन्‍दी ही नहीं तमाम भाषाओं के तमाम सारे ब्‍लाग हैं। साइट हैं। उनमें तमाम तरह की सामग्री प्रकाशित हो रही होगी। ऊपर एक साहब ने रामायण के बारे में कोई लिंक दी है। मैं तो वहां नहीं गया और न जाने का मन है। वह रहे अपनी जगह। आपके ब्‍लाग पर आया क्‍योंकि अच्‍छा लगा। अगर अच्‍छा नहीं लगेगा तो नहीं आऊंगा।

    तीसरी बात आपने ब्‍लाग शुरू करते वक्‍त तो किसी से नहीं पूछा था। कम से कम मुझसे तो नहीं। तो फिर अब यह रायशुमारी क्‍यों। बंद करना है बंद कर दीजिए। मतलब यह है कि किसी के कहने से आप ब्‍लाग न तो शुरू करते हैं और न बंद।

    चौथी बात पोल में वोट कैसे दिए जाते हैं आप अच्‍छी तरह जानते हैं।
    इसलिए इसके आधार पर आप जो निर्णय करेंगे वह भी एक तरह का मजाक ही होगा।

    पांचवीं बात संजय सागर जी संभवत: आपके मित्र हैं। उनसे एक बात कहना चाहता हूं कि आप एक नहीं सौ टिप्‍पणियां करिए। पर एक क्षण के लिए सोचिए ऐसा करके आप नुकसान किसका कर रहे हैं। पिछली पोस्‍ट पर भी आपकी दस बारह टिप्‍पणियां थीं। आपने जो कहा है उसे एक या दो टिप्‍पणियों में कहा जा सकता था। एक ही व्‍यक्ति की इतनी सारी टिप्‍पणियां लगातार देखने पर एक खीझ पैदा होती है। टिप्‍पणी करने वाले के प्रति भी और ब्‍लाग के प्रति भी । इस पर विचार करें।

    अंत में कहूंगा कि गजेन्‍द्र जी तय तो आपको ही करना है। अपनी मर्जी के मालिक आप हैं। हां इतना जरूर कहूंगा कि अगर ब्‍लाग जारी रखते हैं तो अब भी मेरा यही निवेदन है उक्‍त पोस्‍ट जैसी पोस्‍ट लगाने सें बचें।
    शुभकामनाएं।

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  26. आपकी पिछली पोस्ट अभी पढ़ी |
    आपको इस तरह का व्यंग्य लिखने से बचना चाहिए था और उस पोस्ट को हटा लेना चाहिए अगर हमारी लेखनी से किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचती है तो हमारा लिखने का क्या ओचित्य ?
    बाकि आपका ब्लॉग है कुछ भी लिखें और कुछ भी रखे आपकी मर्जी |

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  27. सुनो, गजों में इन्द्र ,मेरी बात ध्यान से सुनो। महाभारत का मूल कारण द्रोपदी का निर्मल हास्य ही था जिससे मेरे दुर्योधन के मन को ठेस पहुची थी। मैं भुक्तभोगी हूँ अतः तुम्हे यही राय दूंगा की किसी को भी ठेस पहुचाये बिना निसंकोच ब्लॉग्गिंग को जारी रखो। पुत्र मेरा आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ रहेगा.

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  28. आप लिखते चलें, शुभकामनाएँ.

    आपत्तियाँ और विचारों में मतभेद होते रहेंगे. असभ्य भाषाओं की टिप्पणियाँ मिटा कर निश्चिंत हो जायें.

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  29. अपने ब्लॉग पर आप का आह्वान पढ़ कर कर आया हूँ। :) आलोचना या विरोध जीवन के भी अंग हैं। क्या उनसे घबरा कर मनुष्य जीना छोड़ देता है? ऐसे छोड़ना होता तो कितने ही ब्लॉगर छोड़ चुके होते, मैं भी।
    बाकी ऊपर की टिप्पणियों पर ध्यान दीजिए। उत्साही की कही बात दुहरा रहा हूँ - आपने ब्‍लाग शुरू करते वक्‍त तो किसी से नहीं पूछा था। कम से कम मुझसे तो नहीं। तो फिर अब यह रायशुमारी क्‍यों। बंद करना है बंद कर दीजिए। मतलब यह है कि किसी के कहने से आप ब्‍लाग न तो शुरू करते हैं और न बंद।
    मुझे यह सस्ते प्रचार का तरीका भर लगता है।
    आप अच्छी सामग्री दे रहे हैं। देते रहिए। मेरी समझ से आप को न तो इस तरीके की आवश्यकता है और न ही 'सीता टाइप' लेखों की। बाकी ... आपका ब्लॉग है कुछ भी लिखें और कुछ भी रखें आपकी मर्जी|
    टिप्पणी का विकल्प रहेगा तो विरोध भी आएगा, समर्थन भी आएगा, प्रशंसा भी आएगी और निन्दा भी। आप स्वतंत्र हैं। उन्हें रखें या मिटा दें।

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  30. नहीं-नहीं ब्लोगिंग छोड़ने की कोई बात ही नहीं है ,आप ब्लोगिंग जगत के एक समझदार ब्लोगर हैं और ये टिप्पणी और सार्थक आलोचना तो ब्लोगिंग को दमदार बनाती है ,इसे स्वीकार करना चाहिए ,टिप्पणी में गलत भाषा का प्रयोग किसी भी हाल में सही नहीं कहा जा सकता ऐसा करने से हम सबको बचना चाहिए ..

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  31. आप किसी का भी हंसी मज़ाक करने को स्वतंत्र है,एसी मज़ाक से यदि कोई आहत होकर विरोध करे तो, आप तो और भी ज्यादा आहत हो उठते है। सवाल यह है कि आपका अभिमान उनके अपमान से भी अधिक है?
    राजेश जी उत्साही एवं गिरिजेश जी राव से पूर्णतः सहमत।
    बंद करना है बंद कर दीजिए। मतलब यह है कि किसी के कहने से आप ब्‍लाग न तो शुरू करते हैं और न बंद।

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  32. ब्लॉग्गिंग ना छोड़िये और ना ही परवा कीजिये ऐसे लोगों कि जो,केवल एकतरफा सोचते हैं, पर हाँ, धार्मिक टिप्पणिओं से बचिए.

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  33. आपको इस तरह का व्यंग्य लिखने से बचना चाहिए था,लेखनी से किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचती है तो हमारा लिखने का क्या ओचित्य ?

    राजेश जी उत्साही एवं गिरिजेश जी राव से पूर्णतः सहमत।
    बंद करना है बंद कर दीजिए। मतलब यह है कि किसी के कहने से आप ब्‍लाग न तो शुरू करते हैं और न बंद।

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  34. गजेंद्र जी,
    हास्य तभी तक आनंद देता है जब वो सर्वहितकारी हो और किसी दूसरे की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए...लेखन में मर्यादा और संयम का बहुत ध्यान रखा जाना चाहिए...व्यंग्य में भी एक एक शब्द को तौल कर लिखना चाहिए...अगर आप हनुमान के लिए बंदर शब्द का इस्तेमाल करते हैं तो वाकई ये गलत है...आप उस पोस्ट
    को हटा दें या नए सिरे से लिखें तो बेहतर है...ये मेरी दोस्त के नाते राय भर है...ज़रूरी नहीं कि आप इसे मानें...

    जय हिंद...

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  35. राजेश उत्साही जी और मोसम कौन(संजय) जी की बात को मेरा भी कहना समझिये..

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  36. आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आना हुआ....बहुत अच्छा लगा... अबसे दस्तक जारी रहेगी...

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  37. Gajendra ji... Kuchh to log kahenge, logon ka kaam hai kahna... aur aapke saath to ek lamba kaarwan hai fir aap kyo chinta karte hain... mai dusron ka nahi jaantee par mera vichaar hai ki, sidhhant likhna ya apni bhavnaye likhna aasan hai bajay ki aap kuchh aisa likhen jo logon ke chehre par muskaan laaye... aur hatiye is roodhiwaadee samaj kee baatein wo to hamesha hee domuhi rahee hain... kal ko yahi yadi kisi badi movie mein nazar aayega to log waha thahaka lagate dikhenge, ho sakta hai ki kuchh "neta-mathani" apni roti bhi sekne kee koshish kare parantu filminame ko to koi farak nahi padega... to aap chaliye mast haathi ki chaal... aur hame hamesh aapki posts ka intzaar rahega... All the luck and success to you..

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  38. ji ek baat aur... jab aapne likhna shuru kiya tha kya tab bhi yunhi poochha tha ki aapko likhna chahiye ya nahi...

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  39. सबसे मजेदार बात यह है कि गजेन्‍द्र जी की जिस पोस्‍ट पर यहां चर्चा हो रही है वह उनकी लिखी हुई नहीं है। उन्‍होंने उसे कहीं और से लेकर लगाया है। उससे भी मजेदार बात यह है कि वे इस बात को स्‍पष्‍ट कह भी नहीं रहे हैं। और तमाम लोग उनकी इस बात के लिए प्रशंसा या आलोचना कर रहे हैं कि वाह आपने क्‍या लिखा है। मैंने इसे पहले भी किसी और ब्‍लाग पर देखा था। इसलिए मैंने केवल पोस्‍ट लगाने पर ही सवाल उठाया था लिखने पर नहीं।

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  40. ब्लोगिंग छोड़ना या ना छोड़ना आपकी मर्ज़ी है जिस पोस्ट के लिए आप मत मांग रहे है वो बहुत पहले मैंने अपने ब्लॉग पर पोस्ट की थी लिंक है http://soni-teekhabol.blogspot.com/2010/07/blog-post.html
    और जो आपने अपने ब्लॉग पर पोस्ट किया वो आपका खुद का लिखा भी नहीं है ये आप मेरी पोस्ट पढ़ के जान जायेंगे और मैं ये नहीं कहूँगी की ये सब मैंने लिखा है ये मझे कहाँ से मिला इसका जिक्र अपने कमेन्ट में किया है मैंने अपनी पोस्ट पर ,........ तो इस पोस्ट पर ब्लॉग छोड़ने या ना छोड़ने जैसी कोई बात खड़ी करने की मुझे कोई ज़रूरत महसूस नहीं होती !

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  41. राजेश जी, सोनी गर्ग जी,

    धन्यवाद आपका इस ब्लॉग पर आने के लिए मैंने नहीं कहा की ये पोस्ट मेरी रचना है , इस तरह से तो आपको इस ब्लॉग पर बहुत सारी पोस्ट मिल जायेंगी, हास्य पर किसी का एकाधिकार नहीं होता, ये पोस्ट मुझे मेरे काफी पुराने सिमकार्ड में एक एस एम् एस के रूप में मिली थी, और मुझे मेरे एक मित्र के द्वारा भेजी गयी थी, जो की उसे भी किसी के द्वारा भेजी गयी थी.
    सवाल इस बात का नहीं की ये पोस्ट मैंने लिखी है या नहीं, बल्कि इस बात का है कि इस के प्रकाशन को लेकर अकित शर्मा जी एवं एक बेनामी शख्स द्वारा कि गयी असभ्य भाषा का इस्तेमाल क्या सही है ????

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  42. और अमित शर्मा जी ने तो अपने शब्दों के लिए माफ़ी भी मांग ली, लेकिन उस बेनामी शख्स का क्या ??? अमित शर्मा जी ने अपने कहे शब्दों का एक कारण दिया था जो कि जायज भी है उनकी नजरो में

    लेकिन उस बेनामी शख्स का क्या जो छिप कर असभ्य शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था ..... अरे अगर हिम्मत है तो सामने आकर बात करो,

    काफी लोगो ने इस पोस्ट पर असंतोष जाहिर लिया, और में आभारी हूँ उन सभी का,

    इस ब्लॉग पर टिपण्णी करनी है तो करे लेकिन एक सभ्य भाषा के साथ

    फिर चाहे वो पोस्ट कि प्रसंसा में हो या आलोचना में .....

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  43. मुझे लगता है गजेन्‍द्र जी अब आपको इस मुद्दे का समापन कर देना चाहिए। जो बेनामी हैं उनका कुछ नहीं किया जा सकता। हिम्‍मत होती तो वे बेनामी ही क्‍यों होते। दूसरी बात आप तो खुद और ब्‍लागों पर जा ही रहे होंगे। मोहल्‍ला पर जाकर देखें‍ कि लोग किस तरह नाम रखकर एक दूसरे को गालियों से नवाज रहे हैं। मैं उनका पक्ष नहीं ले रहा हूं,कह रहा कि बेनामियों से परेशान होने की जरूरत नहीं है।
    यह भी अच्‍छा ही हुआ कि सोनी जी ने खुद ही यह यहां बता दिया कि यह उनके ब्‍लाग पर पहले भी प्रकाशित हुई है। मैंने भी उनके ही ब्‍लाग पर देखी थी। कल भी इस बात को चेक करके आया था। संयोग से वे खुद भी यहां चली आईं।
    यहां यह बात मैंने इसलिए लिखी थी कि बहुत से साथी यह मानकर भी टिप्‍पणी कर रहे थे यह आपने लिखी है।
    बहरहाल आपने हम सबकी बात धैर्य से सुनी और मैं समझता हूं कि गुनी भी। इसलिए अब इसका समापन करके,कोई ऐसी पोस्‍ट लगाइए जो बस मुस्‍कुराने को मजबूर कर दे । आपने हम सबकी टिप्‍पणियों के बीच जो संयम बरता उसके लिए आपको साधुवाद।

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  44. मैं यहाँ पर "नास्तिकों का ब्लॉग" पर आपका लिंक देख कर आया था .और फिर पहली पोस्ट पढ़ कर इस पोस्ट पर आया

    वैसे तो ये आपका ब्लॉग है और भारत में 'ईश निंदा' कानून भी नहीं है तो आप जो चाहें पोस्ट कर सकते हैं ...परन्तु यदि आपने यह ब्लॉग दुस्रून की भावनाओं को आहात करते हुए चलने के लिए नहीं बनाया है तो आपको ये पोस्ट निकाल देनी चाहिए | अब जहाँ तक यह प्रश्न है की इसमें गलत क्या है तो इसमें तो सब कुछ ही गलत है .........उदहारण के रूप में "हनुमन बन्दर" नहीं थे .और "राम गलियां " नहीं देते थे |

    अब जैसा की आपने कुछ लोगों से कहा की "अग्गर मेरा ब्लॉग पसंद नहीं तो न पढ़े "...ठीक है हम तो प्रथम और अंतिम बार आये हैं इस ब्लॉग पर .......तो मेरी बात न मानने से आपको कोई हानि भी नहीं होगी तो अगर आपको मेरी टिप्पड़ी पसंद नहीं आई तो मत पढ़िए

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  45. राजेश जी,
    में ब्लॉग जगत में केवल गजेन्द्र जी का ही मित्र नहीं हूँ, में मित्र हूँ उन सभी लोगो का जिनके ब्लॉग में पढता हूँ, और अब तो आप भी उनमे से एक है ... अभी ब्लॉग की दुनिया में नया हूँ, अभी तक केवल पढने का ही कार्य कर रहा हूँ, ........ जल्द ही कुछ लिखना भी सुरु करूँगा .................

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  46. और हा राजेश जी आपकी सलाह जरुर मानूंगा, धन्यवाद ...... कम से कम टिप्पणियों में अपनी बात कहने की कोशिश करूँगा .....
    गजेन्द्र जी आप ब्लॉग की दुनिया में बने रहे , अच्छा लिखते रहे , ............. मंगल कामनाये

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  47. गजेन्द्र जी,
    आपका ब्लॉग बहुत अच्छा है .... इसे बंद करने का विचार आप अपने दिल से निकल दीजिये ,
    वैसे भी दुनिया में शायद ही ऐसी कोई चीज ही जिस पर विवाद न होता हो,
    आप लोगो के चेहरे पर मुस्कान लाने का जो कार्य कर रहे है वो अपने आप में सबसे ज्यादा अच्छा कार्य है ......
    जिसको पसंद हो वो पढ़े और प्रंससा करे, जिसको नहीं वो आलोचना करे ............

    उत्तर देंहटाएं
  48. वैसे भी दुनिया में शायद ही ऐसी कोई चीज ही जिस पर विवाद न होता हो,
    आप लोगो के चेहरे पर मुस्कान लाने का जो कार्य कर रहे है वो अपने आप में सबसे ज्यादा अच्छा कार्य है ......
    जिसको पसंद हो वो पढ़े और प्रंससा करे, जिसको नहीं वो आलोचना करे ...

    गजेन्द्र जी,, में m जी के कहे से पूरी तरह से सहमत हु, आप दुसरो की चिंता क्यों करते है

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  49. भाई, हमारी वजह से ब्लॉग जगत से रुसवाई न करें.
    लिखिए खूब लिखिए......... यहाँ नहीं लिखेंगे तो कहाँ लिखेंगे. छापने में तो बहुत पैसा खर्च होता है.
    कृपया लिखिए.......
    बाकि हम माफ़ी मांगने से रहे. टिपण्णी मैं हमने जो लिखा ... अपने दिल का लिखा..... आपको पसंद नहीं था तो डिलीट कर देते.

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  50. गजेन्द्र जी ,
    आपके ब्लॉग पर आये थे की कुछ नया मिलेगा, लेकिन अभी तक आपका ये विवाद ही नहीं निपटा है . गजेन्द्र जी हमारी माने तो एक बात कहे पसंद आये तो मन लीजियेगा न पसंद आये तो आपकी इच्छा ....................

    आपके पोल विजेट पर प्राप्त वोटो को संख्या ही दर्शाती है कि आपको क्या करना चाहिए,

    एक और कारण है इसका - कही पढ़ा था कि इन्टरनेट पर लिखा गया हर शब्द अमर हो जाता है ( शायद रवि रतलामी जी के ब्लॉग - छीटे और बौछारे पर ) फिर आपका इस पोस्ट को ब्लॉग से निकलने का क्या फायदा ?

    जो हो चुका है उसे ऐसे ही रहने दीजिये और आगे चलिए .......... मंगल कामनाये आपको उत्तम लेखन के लिए

    गीता में श्री कृष्ण ने भी कहा है -- जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा वह भी अच्छा ही हो रहा है और जो होगा वेह भी अच्छा ही होगा

    उत्तर देंहटाएं
  51. आपके पोल विजेट पर प्राप्त वोटो को संख्या ही दर्शाती है कि आपको क्या करना चाहिए,

    गीता में श्री कृष्ण ने भी कहा है -- जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा वह भी अच्छा ही हो रहा है और जो होगा वेह भी अच्छा ही होगा

    इसे भी पढ़कर कुछ कहे :-
    आपने भी कभी तो जीवन में बनाये होंगे नियम ??

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  52. गजेन्द्र सिंह ने कहा…

    सलीम खान जी,
    धन्यवाद आपके सहयोग का,
    १५ सितम्बर २०१० ११:११ पूर्वाह्न

    सलीम खान जी... गजेन्द्र जी का सहयोग बनाए रखियेगा ... ताकि खून का रिश्ता कायम रहे

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  53. हांलाकि किसी की अभिव्यक्ति पर मुझे तब तक कोई आपत्ति नहीं है जब तक कि उसने सीमाओं का उल्लघंन नहीं किया हो। जहां तक आपकी पोस्ट का सवाल है मुझे तो यह ही समझ नहीं आता कि आपकी कौनसी पोस्ट मौलिक है? मेरे द्वारा पढ़े गये आपके सभी चुटकले पूर्व में सुने जोक्स का संकलन/अनुवाद मात्र लगे,जिसमें सीतामाता वाली पोस्ट भी है। इसलिए बहुत दुख है कि आपको ऐसी रचना(?) के लिए शाबासी और दुत्कार मिल रही है जो आपकी है ही नहीं। कुछ मित्रों ने ईसामसीह या मोहम्मद साहिब पर चुटकला बनाने की आपको चुनौति दी है ये वाकई चिन्ताजनक है क्योंकि यदि आपके द्वारा किसी प्रकार से हिन्दू धर्म का अपमान भी किया गया है तो क्या उस पर किसी अन्य धर्म का उपहास करके मरहम लगाई जा सकती है? कदापि नहीं। ऐसी टिप्पिणयों की मैं निन्दा करता हूं। लेकिन सलीम ख़ान साहब से जरूर पूछना चाहूंगा कि क्या सलमान रश्दि साहब के साथ भी आपकी ऐसी ही सहानुभूति है? है तो कृपा करकें उसे भी भी व्यक्त करें।
    पुनश्चः कभी-कभी कोई मौलिक रचना भी पोस्ट करें। और संभव हो तो टिप्पणी को हटाएं नहीं छापें जरूर।

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  54. mera maana hai k ye post apne aap mai ek misal hai k sirf kuch shabdon k hare phare se kahi bhi haasy bhara ja sakta hai. i like your post very much.

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